वैदिक काल में ऋषि-मुनियों ने परंपरागत खेती में ईश्वरीय ज्ञान पर आधारित विभिन्न ऋतुओं में मौसम एवं जलवायु के पूर्वानुमान करने की विधि बताया है…
वर्ष 2026-27 के खरीफ – रबी – ज़्याद फसलों में वैदिक पंचांग आधारित ऋतु – मौसम – जलवायु का पूर्वानुमान करके अनियमित मौसमी परिवर्तन से फसलों को होने वाले क्षति से नवरण के उपाय किए जा सकते हैं।
इसके लिए स्थानीय भूगोल तथा ऋतु परिवर्तन के साथ – साथ फसल वर्ग, मिट्टी तथा ऋतु अनुसार माह में पक्षानुसार ग्रह – राशि – नक्षत्रों के अवलोकन के आधार पर मौसम एवं जलवायु के पूर्वानुमान करना संभव होता है।
पंजीकरण की अवधि:
१ जनवरी से ३१ मार्च २०२६