वेदिक कृषि प्रशिक्षण
ऑनलाइन हिन्दी प्रशिक्षण कार्यक्रम
पंजीकरण की अवधि:
१ जनवरी से ३० जनवरी २०२६
वैदिक परंपरा में ऋतुओं एवं त्योहारों का फसल-चक्र के साथ गहरा संबंध है..
वेदों में ऋषि-मुनियों द्वारा परंपरागत खेती में लौकिक शक्तियों के प्रभाव की व्याख्या मिलती है…
प्रत्येक दिन…
प्रथम सत्र: रात ७.३० से ८.१० बजे तक (PPT द्वारा प्रस्तुति)
द्वितीय सत्र: रात ८.१५ से ८.५५ बजे तक (PPT द्वारा प्रस्तुति)
तृतीय सत्र: रात ९.०० से ९.३० बजे तक (प्रश्नोत्तर एवं चर्चा)
खंड: 1
दिनांक: ३१ जनवरी २०२६
वैदिक कृषि
- अवधारणा: वेदों के पारंपरिक ज्ञान और प्रथाओं पर आधारित एक समग्र कृषि प्रणाली है। इसका उद्देश्य प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके एक स्थायी और आत्मनिर्भर कृषि प्रणाली का निर्माण करना है।
- सिद्धांत: अहिंसा, यज्ञ, धर्म और कर्म जैसे सिद्धांतों पर आधारित वैदिक कृषि, एक स्थायी और सामंजस्यपूर्ण कृषि प्रणाली का समर्थन करती है।
- नियम: वैदिक कृषि में, खेती को एक धार्मिक क्रिया माना जाता है, जिसमें सभी जीवों की भलाई के लिए बलिदान शामिल है।
- पद्धति: एक स्थायी और समग्र कृषि दृष्टिकोण है जो प्रकृति और आध्यात्मिक सिद्धांतों के साथ सामंजस्य पर जोर देती है
दिनांक: १ फ़रवरी २०२६
कृषि पंचांग
- पाँच अंग: ये सभी तत्व कृषि कार्यों के लिए शुभ और अशुभ समय निर्धारित करने में मदद करते हैं।
- सूर्य लय: यह शब्द सूर्य के प्राकृतिक चक्र और उसकी गति को संदर्भित करता है, जो पृथ्वी पर जीवन और मौसमों को प्रभावित करता है।
- चन्द्र लय: चन्द्र लय विभिन्न चन्द्र कलाएं हैं जो पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा के घूमने के दौरान होती हैं।
- ग्रह-राशि-नक्षत्र: ये तीन महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं… ग्रह आकाश में घूमने वाले खगोलीय पिंड हैं, राशि जो आकाश में एक निश्चित पथ पर स्थित हैं, और नक्षत्र तारा समूहों को कहा जाता है जो चंद्रमा के मार्ग पर फैले हुए हैं।
दिनांक: २१ फ़रवरी २०२६
जीवंत मृदा
- मिट्टी के गुणधर्म: मिट्टी के गुणधर्मों में भौतिक, रासायनिक और जैविक गुण शामिल हैं।
- मिट्टी की उर्वरता: मिट्टी की पौधों को बढ़ने के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को प्रदान करने की क्षमता।
- मिट्टी का कायाकल्प: मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारना और उसकी उर्वरता को फिर से जीवंत करना
- मिट्टी का पुनरोद्धार: मिट्टी के स्वास्थ्य को बहाल करने और सुधारने की प्रक्रिया है।
दिनांक: ३ फ़रवरी २०२६
कम्पोस्टीकृत खाद
- कम्पोस्टिकरण: एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें कार्बनिक पदार्थों को सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित करके खाद (कम्पोस्ट) बनाया जाता है।
- विनिर्माण सामग्री: कम्पोस्ट प्रक्रिया में उपयोग होने वाली विभिन्न प्रकार की सामग्री को कहते हैं।
- घटक पोषक तत्व: खाद का उपयोग कार्बन के योग के माध्यम से मिट्टी की संरचना में सुधार करने और पौधों को पोषक तत्व प्रदान करने के लिए किया जाता है।
- मिट्टी का संतुलन: मिट्टी में पोषक तत्वों और अन्य घटकों का एक इष्टतम अनुपात है जो पौधों के विकास और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है