वेदिक कृषि प्रशिक्षण

ऑनलाइन हिन्दी प्रशिक्षण कार्यक्रम 

पंजीकरण की अवधि:

१ जनवरी से  १७  मार्च  २०२६ 

वैदिक परंपरा में ऋतुओं एवं त्योहारों का फसल-चक्र के साथ गहरा संबंध है..

वेदों में ऋषि-मुनियों द्वारा परंपरागत खेती में लौकिक शक्तियों के प्रभाव की व्याख्या मिलती है…

प्रत्येक दिन

प्रथम सत्र: रात  ७.३० से  ८.१० बजे तक (PPT द्वारा प्रस्तुति)

द्वितीय सत्र: रात  ८.१५  से  ८.५५  बजे तक (PPT द्वारा प्रस्तुति)

तृतीय  सत्र: रात  ९.०० से  ९.३०  बजे तक (प्रश्नोत्तर एवं चर्चा)

खंड: 5

दिनांक: 18 मार्च 2026 

फसल सुरक्षा

  • जैविक-अजैविक तनाव: फसलों की सुरक्षा के लिए जैविक और अजैविक तनावों का प्रबंधन महत्वपूर्ण है।
  • लाभकारी-शत्रु कीट: फसल सुरक्षा में लाभकारी-शत्रु कीट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • रोग-परजीवी-कुपोषण: फसल सुरक्षा में रोग, परजीवी, और कुपोषण महत्वपूर्ण कारक हैं जो उपज को प्रभावित करते हैं। रोग और परजीवी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जबकि कुपोषण, जो पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है, पौधों के विकास और स्वास्थ्य को प्रभावित करता है.
  • निवारक उपाय: फसल सुरक्षा के लिए निवारक उपाय, यानि फसलों को बीमारियों, कीटों, खरपतवारों और अन्य समस्याओं से बचाने के लिए, कई तरह के उपाय किए जा सकते हैं।

दिनांक: 19 मार्च 2026

फसल की कटाई

  • इष्टतम फसल परिपक्वता: फसल की कटाई के लिए इष्टतम समय, फसल की परिपक्वता के सही स्तर पर निर्भर करता है। यह सुनिश्चित करता है कि फसल की गुणवत्ता, उपज और भंडारण क्षमता बनी रहे.
  • फसल अवस्था: फसल की कटाई के लिए सही अवस्था का चुनाव उपज और गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • उपयुक्त समय: फसल की कटाई का उपयुक्त समय फसल के प्रकार, पकने की अवधि और मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है।
  • उपयुक्त विधि-विकल्प: फसल काटने का परंपरागत साधन श्रमसाध्य और समय लेने वाली है, लेकिन फिर भी कई छोटे खेतों और उन इलाकों में इसका इस्तेमाल किया जाता है जहाँ मशीन से कटाई संभव नहीं है।

दिनांक: 20 मार्च 2026

शस्योत्तर प्रबंधन

फसल की कटाई के बाद, उसके भंडारण, प्रसंस्करण, और विपणन तक की प्रक्रिया का प्रबंधन करना ।

  • सुखाना–फटकना:
  • धुलाई–सफाई:
  • पृथकरण–श्रेणीकरण:
  • प्रसंस्करण:

दिनांक: 21 मार्च 2026

भंडारण – बिक्री प्रबंधन

संभारण प्रबंधन का अर्थ है, वस्तुओं और सेवाओं को उनके उद्गम स्थान से उपभोक्ता तक पहुंचाने की योजना, कार्यान्वयन और नियंत्रण की प्रक्रिया

  • उत्पादक-क्रेता संबंध:
  • बाजार दर पूर्वानुमान:
  • संवेष्टन–संकुलन:
  • प्रेषण-वितरण-परिवहन:
  • Venue : Online

Organizers

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